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जब हम 'कैंसर' शब्द सुनते हैं, तो हमारा पूरा ध्यान केवल शरीर पर होने वाले इसके प्रभावों और उपचार की जटिलताओं पर सिमट जाता है। लेकिन एक ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) के रूप में, मैंने देखा है कि कैंसर केवल कोशिकाओं की बीमारी नहीं है, बल्कि यह मरीज के मन, भावनाओं और आत्मा की भी परीक्षा है।
अक्सर मरीज और उनके परिवार यह भूल जाते हैं कि एक स्वस्थ और सकारात्मक मस्तिष्क ही कैंसर से लड़ने की सबसे बड़ी शक्ति है। इस लेख में हम विस्तार से चर्चा करेंगे कि कैंसर के दौरान मानसिक चुनौतियों का सामना कैसे करें और रिकवरी को कैसे बेहतर बनाएं।
कैंसर के Diagnosis से लेकर उपचार तक, मरीज अक्सर इन भावनात्मक चरणों से गुजरता है:
इन भावनाओं को समझना ही रिकवरी की पहली सीढ़ी है। यदि यह उदासी हफ्तों तक बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कैंसर के कई मरीज उपचार के दौरान 'कीमो-ब्रेन' (Cognitive Fatigue) का अनुभव करते हैं। इसमें व्यक्ति को चीजें याद रखने में कठिनाई, ध्यान केंद्रित करने में समस्या और मानसिक धुंधलापन महसूस होता है।
कैंसर का उपचार अस्पताल में होता है, लेकिन इसकी जीत घर पर शुरू होती है। मरीज इन तरीकों से अपनी मानसिक शक्ति बढ़ा सकते हैं:
योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर और सांसों का मेल है। कैंसर मरीजों के लिए अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम अत्यंत लाभकारी हैं। यह कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को कम करते हैं और शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाते हैं।
प्रतिदिन केवल 10-15 मिनट का ध्यान आपके मस्तिष्क को शांत कर सकता है। 'माइंडफुलनेस' का अभ्यास आपको वर्तमान में जीना सिखाता है, जिससे भविष्य का डर कम होता है।
मस्तिष्क और पेट का गहरा संबंध है। ओमेगा-3 फैटी एसिड और ताजे फल-सब्जियों का सेवन न केवल शरीर को ऊर्जा देता है, बल्कि आपके मूड को भी स्थिर रखने में मदद करता है।
कैंसर मरीज के लिए उसका परिवार सबसे बड़ी दवा है। परिवार को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
कैंसर के इलाज में एक ऐसा समय आता है जब केवल इच्छाशक्ति काफी नहीं होती। जब चिंता (Anxiety) और उदासी (Depression) मरीज की नींद, भूख और जीने की इच्छा को प्रभावित करने लगे, तब विशेषज्ञ की मदद लेना अनिवार्य हो जाता है।
मस्तिष्क की रसायन विज्ञान (Brain Chemistry) में बदलाव के कारण होने वाले इन विकारों को एक विशेषज्ञ ही समझ सकता है। लखनऊ में कई अच्छे Psychiatrist उपलब्ध हैं जो इन हालातों में आपकी सही काउंसलिंग कर सकते हैं। सही वक्त पर ली गई प्रोफेशनल मदद आपको डिप्रेशन के अंधेरे से बाहर निकाल सकती है।
डॉ. सौरभ जायसवाल जैसे मानसिक रोग विशेषज्ञ, जिन्होंने NIMHANS और IHBAS जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं, कैंसर मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य को संभालने में निपुण हैं। वे न केवल दवाओं बल्कि थेरेपी के माध्यम से मरीज को इस कठिन दौर से बाहर निकालने में मदद करते हैं।
कैंसर एक लंबी यात्रा है, लेकिन आपको इसे अकेले तय करने की जरूरत नहीं है। सही उपचार, योग, परिवार का साथ और जरूरत पड़ने पर एक विशेषज्ञ मनोचिकित्सक का मार्गदर्शन मिलकर इस जंग को आसान बना सकते हैं। डॉ. अमित पांडे और हमारी पूरी टीम आपकी शारीरिक और मानसिक खुशहाली के लिए हमेशा तत्पर है।